हिंदी के प्रचार प्रसार में अग्रणी प्रकाशन
शकुन्तला प्रेस ऑफ़ इंडिया प्रकाशन द्वारा प्रस्तुत
युवाओं के दिलों की धड़कनों को तेज करने के लिए पेश है
आपकी शायरी
मेरा लगभग 13 साल पहले एक ख्याब था कि- एक अपनी शेरों-शायरी की "आपकी शायरी " के नाम से एक किताब प्रकाशित करूँ और फिर उसके बाद "आपकी शायरी" के द्धितीय संसकरण में आमन्त्रित्र शायरों की रचनाएँ प्रकाशित हो. आज यह ख्याब किताब के रूप में तो नहीं मगर ब्लॉग के माध्यम से कुछ हद तक पूरा हो रहा है. इसमें अपनी रचनाओं के साथ कुछ संकलन रचनाएँ भी प्रकाशित करूँगा.
"सुना है आप हमारा घर भूल गए
अरे! भूले तो भूल गए
इसमें भी पछताना क्या
भूले तो हम
मगर हम कुछ इस कद्र भूले
कि उनका घर तो याद रहा
मगर अपना घर भूल गए."
अरे! भूले तो भूल गए
इसमें भी पछताना क्या
भूले तो हम
मगर हम कुछ इस कद्र भूले
कि उनका घर तो याद रहा
मगर अपना घर भूल गए."